तोमस्क शहर की ज़िला अदालत ने स्थानीय अभियोजक के उस आरोप को निरस्त कर दिया है, जिसमें यह अनुरोध किया गया था कि भगवद् गीता को अतिवादी भावनाएँ भड़काने वाला ग्रंथ मान लिया जाए। यह सूचना रिया नोवस्ती समाचार समिति के संवाददाता ने सीधे अदालत से भेजी है।
विगत जून-2011 में तोमस्क नगर के अभियोजन विभाग ने स्थानीय अदालत से तोम्स्क स्थित कृष्ण चेतना समाज की धार्मिक गतिविधियों की जाँच कराने का अनुरोध किया था। कृष्ण चेतना समाज उन वैष्णव शिक्षाओं का प्रचार करता है, जो भगवद् गीता के स्वामी प्रभुपाद द्वारा किए गए अनुवाद में बताई गई हैं।
तोमस्क नगर के अभियोजन विभाग द्वारा दायर किए गए इस मुक़दमे को रूस के बहुत से निवासी, रूस में रहने वाले हिन्दुओं के अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। रूस के हिन्दुओं के साथ-साथ रूस के अन्य धर्मों के अनुयायियों ने भी तथा भारत के निवासियों ने भी इस मुक़दमे के बारे में अपनी नाराज़गी और रोष प्रकट किया था।
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