23 अगस्त 2012, 15:49

अन्तर्राष्ट्रीय वायु-परिवहन सम्मेलन-2012 : नई प्रस्तुतियाँ, नए सुझाव

अन्तर्राष्ट्रीय वायु-परिवहन सम्मेलन-2012 : नई प्रस्तुतियाँ, नए सुझाव

वोल्गा नदी के किनारे बसे रूस के उल्यानोव्स्क नगर में अन्तर्राष्ट्रीय वायु-परिवहन सम्मेलन-2012 शुरू हो गया। इस सम्मेलन

वोल्गा नदी के किनारे बसे रूस के उल्यानोव्स्क नगर में अन्तर्राष्ट्रीय वायु-परिवहन सम्मेलन-2012 शुरू हो गया। इस सम्मेलन के अन्तर्गत चीन, रूस, फ़्राँस, जर्मनी और दूसरे देशों की एयरलाइनों ने मिलकर एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया है। यह सम्मेलन सैन्य और नागरिक विमान बनाने वाली रूस की एक सबसे बड़ी कम्पनी 'आवियास्टार' के परिसर में हो रहा है।

रूस के उपप्रधानमंत्री दिमित्री रगोज़िन ने इस अन्तर्राष्ट्रीय वायु-परिवहन सम्मेलन-2012 का उद्घाटन करते हुए कहा -- रूसी विमान उद्योग को आशा है कि उसे विमानों के नए और बड़े आर्डर मिलेंगे। इस सम्मेलन में रूस में निर्मित एक नए विमान आई०एल०-476 (आई०एल०76 एम०डी०90ए०) को पहली बार सबके सामने व्यापक रूप से प्रस्तुत किया गया। यह नया विमान विश्व-प्रसिद्ध सैन्य-परिवहन विमान आई०एल०-76 का ही नया संशोधित और आधुनिकीकृत रूप है।

इस नए विमान की भारवहन क्षमता 50 टन है और यह अधिकतम 850 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से छह हज़ार किलोमीटर तक की सीधी उड़ान भर सकता है। रूस की विज्ञान अकादमी के सेंट-पीटर्सबर्ग विमान और अंतरिक्ष इतिहास विभाग के अध्यक्ष विताली लेबेदेव ने बताया कि इस विमान के पंख एकदम नई क़िस्म के हैं। विताली लेबेदेव ने कहा :

आजकल दुनिया में जिस तेज़ी से इलैक्ट्रोनिक का विकास हो रहा है, उसकी वज़ह से विमानों की संभावनाएँ भी बढ़ती जा रही हैं। हमने इन बढ़ती हुई संभावनाओं का इस्तेमाल करने की कोशिश की है और विमान में नई दिशा-सूचक प्रणाली तथा नई स्वाचालित-संचालन प्रणाली लगा दी है। पुरानी क़िस्म के इंजनों की जगह इस नए विमान में हमने नए पी०एस०-90 इंजन लगाए हैं। यह इंजन भी पूरी तरह से रूस की स्वदेशी तक्नोलौजी पर आधारित हैं।

रूस का रक्षा-मंत्रालय सेना को नवीनतम अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित करने के राजकीय कार्यक्रम के अन्तर्गत कुछ नए आई०एल०-476 विमानों का भी आर्डर देने जा रहा है। लेकिन वे विमान ऐसे टैंकर विमान होंगे जो हवा में ही दूसरे विमानों के लिए पैट्रोल-पम्प का काम करते हुए उन्हें आकाश में ही तेल उपलब्ध कराएँगे। इसके अलावा ऐसे कुछ विमानों का इस्तेमाल सैन्य-परिवहन के लिए भी किया जाएगा। 'स्वतन्त्र सैन्य-समीक्षा' नामक अख़बार के सम्पादक वीक्तर लितोवकिन ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में इस विमान की बड़ी माँग होगी। वीक्तर लितोवकिन ने कहा :

दुनिया में इस तरह के विमान क़रीब-क़रीब नहीं के बराबर हैं। आज भी नाटो अफ़ग़ानिस्तान से अपना सारा माल-असबाब आई०एल०-76 और ए०एन०-124 जैसे रूसी विमानों से ही ढो रहा है। चीन भी काफ़ी समय से किसी नए माल परिवहन-विमान की तलाश में है। रूस की सेना से मिले आर्डर को पूरा करने के बाद सबसे पहले चीन को ही ये नए विमान सप्लाई किए जाएँगे। भारत को भी इस तरह के विमानों की बहुत ज़रूरत है।

वायु परिवहन एजेंसी 'आवियापोर्ट' के संचालक अलेग पन्तील्येव ने कहा कि रूस इस सप्ताह विश्व व्यापार संगठन का सदस्य बन गया है। अब रूसी विमान उद्योग को भी विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुकूल ही सारा काम-धंधा करना होगा। अलेग पन्तील्येव ने कहा :

इस सम्मेलन में मुख्य तौर पर इसी सवाल पर विचार किया जाएगा कि भूमंडलीकरण की स्थितियों में विश्व विमान उद्योग में भी प्रतियोगिता बढ़ती जा रही है। अब रूस के विमान उद्योग को विश्व व्यापार संगठन के नियमों का भी ख़याल रखना होगा। इन मुश्किल हालातों को देखते हुए ही रूस के विमान उद्योग और परिवहन उद्योग के लिए सुझाव तय किए जाएँगे।

इस सम्मेलन का समापन एक शानदार एयर-शो के साथ होगा। उल्यानोव्स्क नगर के हवाई-अड्डे पर रूस और दुनिया के प्रमुख करामाती पायलट-दल अपने करिश्मे दिखाएँगे।

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